भारतीय नागरिकता कानून CAA क्या है | What is CAA Law in India in Hindi

What is CAA Law in India in Hindi

What is CAA Law in India in Hindi, भारतीय नागरिकता कानून CAA क्या है, सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (Citizenship Amendment Act), CAA का फुल फॉर्म, CAA कानून लागू होने के बाद क्या बदलेगा? CAA और NRC के बीच अंतर

गृह मंत्रालय 2024 के लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) की अधिसूचना जारी कर सकता है। इसके बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी।

What is CAA Law in India | भारतीय नागरिकता कानून CAA क्या है

CAA का फुल फॉर्म Citizenship Amendment Act (नागरिकता संशोधन कानून) है।

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के लागू होने के बाद, दिसंबर 2014 तक तीन पड़ोसी मुस्लिम बहुल देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से जो लोग किसी न किसी उत्पीड़न के कारण भारत आए थे, उन्हें भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। इसमें गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक – हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं।

2016 में नागरिकता संशोधन बिल पहली बार लोकसभा में पेश किया गया था। यहां से ये पास तो हो गया लेकिन राज्यसभा में अटक गया। बाद में इसे संसदीय समिति के पास भेजा गया और फिर 2019 का चुनाव आया और फिर मोदी सरकार आ गई।

दिसंबर 2019 में इसे दोबारा लोकसभा में पेश किया गया। इस बार यह बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पास हो गया। इसे 10 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। हालांकि, उस समय कोरोना महामारी के कारण इसके कार्यान्वयन में देरी हुई।

CAA से किसे मिलेगी नागरिकता:

Citizenship Amendment Act के तहत, धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के बाद 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता दी जाएगी। केवल इन तीन देशों के लोग ही नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे।

CAA का भारतीय नागरिकों पर नहीं पड़ेगा असर:

Citizenship Amendment Act का भारतीय नागरिकों से कोई लेना-देना नहीं है। संविधान के तहत भारतीयों को नागरिकता का अधिकार है। CAA या कोई भी कानून इसे छीन नहीं सकता।

CAA और NRC के बीच अंतर

CAANRC
CAA धर्म के आधार पर भारतीय नागरिकता देगा।NRC का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।
CAA से गैर-मुस्लिम प्रवासियों को फायदा होने की संभावना है।NRC का उद्देश्य सभी गैरकानूनी अप्रवासियों को उनके धर्म की परवाह किए बिना निर्वासित करना है।
CAA पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करेगा।NRC का उद्देश्य असम में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना था, जिनमें से ज्यादातर बांग्लादेश से थे।
CAA 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश करने वाले अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करेगा।NRC में वे लोग शामिल होंगे जो यह साबित कर सकेंगे कि वे या उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 को या उससे पहले भारत में रहते थे।

क्या होगी आवेदन की प्रक्रिया:

आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रहेगी। आवेदकों को यह बताना होगा कि वे भारत कब आए। अगर उनके पास पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज नहीं हैं तो भी वे आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत भारत में रहने की अवधि पांच साल से अधिक रखी गयी है। अन्य विदेशियों (मुसलमानों) के लिए यह अवधि 11 साल से अधिक है।

इन देशों के गैरकानूनी मुस्लिम इमिग्रेंट्स का क्या होगा?

Citizenship Amendment Act विदेशियों को बाहर निकालने के लिए नहीं है। इसका अवैध आप्रवासियों को बाहर निकालने से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे शरणार्थियों पर विदेशी एक्ट 1946 और पासपोर्ट एक्ट 1920 पहले से ही लागू हैं। दोनों कानूनों के तहत, किसी भी देश या धर्म के विदेशियों को भारत में प्रवेश करने या निष्कासित करने की अनुमति है।

सरकार CAA को अब तक क्यों टालती रही:

बीजेपी शासित असम-त्रिपुरा में CAA पर आशंकाएं पैदा हो गयी है। पहला विरोध प्रदर्शन भी असम में हुआ। Citizenship Amendment Act में प्रावधान है कि 24 मार्च 1971 से पहले जो विदेशी लोग असम में आकर बसे हैं, उन विदेशियों को नागरिकता दी जाएगी। इसके बाद बांग्लादेश एक अलग देश बन गया था।

Citizenship Amendment Act (CAA)

CAA को लेकर लोगों के मन में क्या आशंकाएं थीं:

CAA को NRC यानी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की दिशा में एक कदम के रूप में देखा गया था। लोगों को डर था कि बड़ी संख्या में लोगों को विदेशी घुसपैठिया बताकर बाहर निकाल दिया जाएगा।

CAA के बाद NRC लागू होने के बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश में आशंका व्यक्त की गई थी कि बांग्लादेशी शरणार्थी बड़ी संख्या में वापस लौटेंगे।

क्या अभी तक किसी को नागरिकता नहीं मिली?

सरकार ने नागरिकता को लेकर 9 राज्यों के डीएम को बड़ी शक्तियां दे दी हैं। पिछले दो वर्षों में 9 राज्यों के 30 से अधिक जिलाधिकारियों और गृह सचिवों को अधिकार दिए गए हैं। डीएम के पास अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता देने की शक्ति है।

4 साल में 3,117 अल्पसंख्यकों को नागरिकता मिली। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिसंबर 2021 में राज्यसभा को बताया था कि वर्ष 2018, 2019, 2020 और 2021 के दौरान पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के कुल 3,117 अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई। हालाँकि, 8,244 आवेदन प्राप्त हुए थे।

गृह मंत्रालय की 2021-22 रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर 2021 में कुल 1,414 विदेशियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई। जिन 9 राज्यों में नागरिकता दी गई है उनमें गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र शामिल हैं।

शरणार्थी नॉर्थ ईस्ट में क्यों बसे?

पूर्वोत्तर अब अल्पसंख्यक बंगाली हिंदुओं का गढ़ बन गया है। इसकी वजह भी सामने आ गई है। पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा बड़ी संख्या में बंगाली भाषी लोगों का घर था, जिन्हें लगातार हिंसा का सामना करना पड़ता था। 1971 में, युद्ध हुआ और एक नया देश बांग्लादेश बना, लेकिन, कुछ ही समय में बांग्लादेश में भी हिंदू बंगालियों पर अत्याचार होने लगा, क्योंकि बांग्लादेश में भी मुस्लिम बहुसंख्यक हैं।

पाकिस्तान और बांग्लादेश में अत्याचारों से तंग आकर लोग भारत की ओर पलायन करने लगे। हालाँकि ये लोग अलग-अलग राज्यों में बस रहे थे, लेकिन उन्हें नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति अपने करीब लगी और वे वहीं बसने लगे। चूंकि पूर्वोत्तर राज्यों की सीमा बांग्लादेश से लगती है, इसलिए वहां से भी लोग आते हैं।

Citizenship Amendment Act से क्या बदल जाएगा?

हालाँकि गारो और जैंतिया जैसी जनजातियाँ मेघालय की मूल निवासी हैं, लेकिन अल्पसंख्यकों के आने के बाद वे पीछे रह गईं। सर्वत्र अल्पसंख्यकों का दबदबा हो गया।

इसी तरह त्रिपुरा में बोरोक समुदाय मूल निवासी है, लेकिन वहां भी बंगाली शरणार्थी भर गए हैं। यहां तक कि सरकारी नौकरियों में बड़े पद भी उनके पास चले गए हैं।

असम में 20 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी हिंदू अवैध रूप से रह रहे हैं। 2019 में स्थानीय संगठन कृषक मुक्ति संग्राम समिति ने यह दावा किया था। अन्य राज्यों में भी यही स्थिति है।

अब Citizenship Amendment Act लागू हुआ तो मूलवासियों की बची ताकत भी खत्म हो जायेगी। दूसरे देशों से आकर बसने वाले अल्पसंख्यक उनके संसाधनों पर कब्ज़ा कर लेंगे। इसी डर के चलते पूर्वोत्तर CAA का पुरजोर विरोध कर रहा है।

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