भारत का गगनयान मिशन क्या है? What is the Gaganyaan Mission of India

What is the Gaganyaan mission of India

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गगनयान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का 2024 तक तीन सदस्यीय दल को अंतरिक्ष में भेजने का एक मिशन है।

इस अंतरिक्ष मिशन की घोषणा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में अपने स्वतंत्रता दिवस राष्ट्र के नाम संबोधन में की थी। मानवयुक्त मिशन से पहले इसरो ने गगनयान मिशन के तहत दो मानवरहित मिशन भी अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई है। पहला मानवरहित मिशन दिसंबर 2020 में और दूसरा मिशन जून 2021 में भेजने की योजना थी।

हालाँकि, कोरोनोवायरस महामारी के कारण पहले मानव रहित मिशन में देरी हुई है। अब 2023-2024 में यह मिशन लॉन्च किया जाएगा, जिसकी कुल लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।

‘गगनयान’ में 3 सदस्यों की एक टीम को 3 दिवसीय मिशन के लिए 400 किमी ऊपर पृथ्वी की कक्षा में भेजा जाएगा। इसके बाद क्रू मॉड्यूल को समुद्र में सुरक्षित उतार दिया जाएगा। अगर भारत अपने मिशन में सफल रहा तो वह ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस ऐसा कर चुके हैं।

  • 12 अप्रैल 1961 को सोवियत रूस के यूरी गगारिन 108 मिनट तक अंतरिक्ष में रहे।
  • 5 मई 1961 को अमेरिका के एलन शेफर्ड 15 मिनट तक अंतरिक्ष में रहे।
  • 15 अक्टूबर 2003 को चीन का यांग 21 घंटे तक अंतरिक्ष में रहा।

What is the Gaganyaan mission of India? भारत का गगनयान मिशन क्या है?

गगनयान इसरो द्वारा निर्मित एक अंतरिक्ष यान है, जिसमें इसरो (ISRO) एक महिला रोबोट के साथ तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजेगा। यह पृथ्वी से 300-400 किमी की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 5-7 दिनों तक परिक्रमा करेगा और वापस लौट आएगा। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में पहली बार इस मिशन की घोषणा अपने स्वतंत्रता दिवस राष्ट्र के नाम संबोधन में की थी।

Purpose of Gaganyaan Mission | गगनयान मिशन का उद्देश्य

  • इसरो साल के अंत तक पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, गगनयान के तहत दो प्रारंभिक अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करेगा। इनमें से एक मिशन पूरी तरह से मानवरहित होगा और दूसरे मिशन में व्योममित्र नामक महिला रोबोट को भेजा जाएगा।
  • शुरुआती मिशन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गगनयान रॉकेट जिस रास्ते से अंतरिक्ष में जाएगा उसी रास्ते से सुरक्षित वापस लौट आए, यानी इसकी सफलता के बाद ही 2024 में इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
  • तीसरे मिशन की अंतरिक्ष उड़ान में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। ये लोग 7 दिनों तक अंतरिक्ष [लो अर्थ ऑर्बिट (LEO)] में रहेंगे। मिशन के लिए भारतीय वायुसेना के चार पायलटों को रूस भेजकर उन्हें अंतरिक्ष प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण दिया गया है।
  • अंतरिक्ष में जाने वाले इन अंतरिक्ष यात्रियों को गगनॉट्स कहा जाएगा। भारतीय वायुसेना में चार पायलटों में से एक ग्रुप कैप्टन और बाकी तीन विंग कमांडर हैं, जिन्हें गगनयान मिशन के लिए तैयार किया जा रहा है।

इससे पहले इसरो ने 8 से 10 अगस्त के बीच चंडीगढ़ में गगनयान मिशन के लिए ड्रैग पैराशूट का सफल परीक्षण किया था। यह पैराशूट अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित लैंडिंग में मदद करेगा। इससे क्रू मॉड्यूल की स्पीड धीमी हो जाएगी, साथ ही यह स्थिर भी रहेगा। इसके लिए परीक्षण के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग जैसी स्थिति बनाई गई थी।

What are the Features of Gaganyaan Mission? गगनयान मिशन की विशेषताएं क्या हैं?

गगनयान मिशनविवरण / विशेषताएं
नामगगनयान
संचालकइसरो (ISRO)
एप्लीकेशनक्रू ऑर्बिटल व्हीकल
निर्माताभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO),
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO),
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)
निर्माण करने वाला मूल देशभारत
मिशन की घोषणा किसने कीपी. एम. नरेंद्र मोदी
मिशन की घोषणा कब की गई थी15 अगस्त 2018, स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए
लागत10,000 करोड़ रुपये (लगभग)
गगनयान का अर्थसंस्कृत: गगन-यान, “स्पेस क्राफ्ट”
महत्वभारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का प्रारंभिक अंतरिक्ष यान
लॉन्चबिना चालक दल के: 21 अक्टूबर 2023
चालक दल: 2024
गगनयानस्पेसिफिकेशंस
स्पेसक्राफ्ट टाइपचालक दल (Crewed)
क्रू क्षमता3 एस्ट्रोनॉट्स (अंतरिक्ष यात्री)
लाइफ7 दिन
रेंजपृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट)
पावरफोटोवोल्टिक ऐरे
लॉन्च मास8,200 किग्रा (18,100 पाउंड) (सर्विस मॉड्यूल शामिल है)
ड्राई मास3,735 किग्रा (8,234 पौंड)
डायमेंशनडायामीटर: 3.5 मीटर (11 फीट),
हाइट: 3.58 मीटर (11.7 फीट)
वॉल्यूम8 एम3 (280 क्यू फीट)

When will Gaganyaan be Launched | गगनयान कब लॉन्च किया जाएगा

21 अक्टूबर 2023 को इंडियन रिसर्च स्पेस ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) गगनयान मिशन की पहली टेस्ट फ्लाइट आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भेजेगा। इसकी जानकारी साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर जितेंद्र सिंह ने दी।

इस परीक्षण में क्रू मॉड्यूल को आउटर स्पेस (पृथ्वी से 300-400 किमी की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट पर) में लॉन्च करना, इसे पृथ्वी पर वापस लाना और बंगाल की खाड़ी में टचडाउन के बाद इसे पुनर्प्राप्त करना शामिल है।

Key Points of Gaganyaan | गगनयान के मुख्य बिंदु

  • गगनयान अंतरिक्ष कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2018 को अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान की थी।
  • गगनयान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक मिशन है, जो भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन होगा।
  • गगनयान कार्यक्रम के तहत तीन उड़ानें कक्षा में भेजी जाएंगी। इसमें दो मानवरहित उड़ानें और एक मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान होगी।
  • भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को बूस्टर इंजन जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल MkIII (GSLV Mk III) रॉकेट अंतरिक्ष में ले जाएगा।
  • गगनयान सिस्टम मॉड्यूल, जिसे ऑर्बिटल मॉड्यूल कहा जाता है, एक महिला रोबोट (व्योममित्र) सहित तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा।
  • गगनयान पृथ्वी से 300-400 किमी की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 5-7 दिनों तक पृथ्वी की परिक्रमा करेगा।
  • इस लॉन्च के साथ, भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानव अंतरिक्ष यान मिशन शुरू करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

Gaganyaan Payloads | गगनयान पेलोड

  • क्रू मॉड्यूल – मानव को ले जाने वाला अंतरिक्ष यान (स्पेसक्राफ्ट)।
  • सर्विस मॉड्यूल – दो तरल प्रोपेलेंट इंजनों (liquid propellant engines) द्वारा संचालित।
  • यह इमरजेंसी एस्केप और इमरजेंसी मिशन एबॉर्ट क्षमता से लैस होगा।
Gaganyaan mission of India

Gaganyaan Mission Significance | गगनयान मिशन का महत्व

  • यह हमारे देश (भारत) में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के स्तर को बढ़ाने और युवाओं को प्रेरित करने में मदद करेगा।
  • गगनयान प्रोजेक्ट के विकास में कई एजेंसियां, प्रयोगशालाएं, निजी उद्योग और विभाग शामिल हैं।
  • इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। कई देशों द्वारा स्थापित एक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) निकट भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं होगा। विकास के लिए एक क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र (regional ecosystem) की आवश्यकता होगी और गगनयान भोजन, पानी और ऊर्जा सुरक्षा जैसी क्षेत्रीय जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • इससे सामाजिक कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी के विकास में मदद मिलेगी।
  • इससे औद्योगिक विकास को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। 2021 में, अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए IN-SPACE (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) नामक एक नए संगठन की घोषणा की गई। यह भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के तहत एक सिंगल विंडो स्वायत्त संगठन है।
  • यह भारत के अन्य आगामी अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
  • इस लॉन्च के साथ भारत एलीट क्लब ऑफ नेशंस (अमेरिका, चीन और रूस) में शामिल हो जाएगा।
  • यह इसरो द्वारा शुरू किया गया अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम है और यह देश के भीतर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देगा, साथ ही युवाओं और स्टार्ट-अप को बड़ी चुनौतियों का सामना करने और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।

History of Gaganyaan Mission | गगनयान मिशन का इतिहास

गगनयान का प्रारंभिक अध्ययन और तकनीकी विकास 2006 में सामान्य नाम “ऑर्बिटल व्हीकल” के तहत शुरू हुआ। इस योजना में लगभग एक सप्ताह तक अंतरिक्ष में रहने, दो अंतरिक्ष यात्रियों की क्षमता और पुन: प्रवेश के बाद स्प्लैशडाउन (Splashdown) लैंडिंग के साथ एक साधारण कैप्सूल डिजाइन करने की थी।

उस समय (2007 में) यह परियोजना लगभग ₹10,000 करोड़ के बजट के साथ शुरू की गई थी और 2024 तक पूरा होने की उम्मीद थी। मार्च 2008 तक इसरो द्वारा इसके डिजाइन को अंतिम रूप दिया गया और फंडिंग के लिए भारत सरकार के सामने प्रस्तुत किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर विचार करने के बाद, फरवरी 2009 में देश के पहले भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के फंडिंग के लिए सरकार ने मंजूरी दी। लेकिन सीमित विकास निधि के कारण यह राशि आवश्यकता से कम थी।

शुरू में, कक्षीय वाहन (orbital vehicle) की पहली मानव रहित उड़ान 2013 में प्रस्तावित की गई थी, इसके बाद 2016 में संशोधन किया गया। हालाँकि, अप्रैल 2012 में यह बताया गया कि फंडिंग के समस्याओं के कारण परियोजना का भविष्य गंभीर संदेह में है।

अगस्त 2013 में यह घोषणा की गई थी कि भारत के सभी चालक दल के अंतरिक्ष उड़ान प्रयासों को इसरो की प्राथमिकता सूची से बाहर कर दिया गया है। लेकिन, इस प्रोजेक्ट पर 2014 की शुरुआत में पुनर्विचार किया गया और यह स्पेस प्रोजेक्ट फरवरी 2014 में घोषित पर्याप्त बजट वृद्धि के मुख्य लाभार्थियों में से एक था।

इसरो अपने 550 किलोग्राम स्पेस कैप्सूल रिकवरी एक्सपेरिमेंट (SRI) द्वारा किए गए परीक्षणों के आधार पर गगनयान ऑर्बिटल व्हीकल विकसित कर रहा है, जिसे जनवरी 2007 में लॉन्च और रिकवर किया गया था।

पहले भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को 2017 में नई NDA सरकार से बड़ा समर्थन मिला और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 के स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्र के नाम संबोधन में इसे औपचारिक रूप से स्वीकार किया। वर्तमान गगनयान डिज़ाइन को तीन-व्यक्ति दल को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

गगनयान मिशन के दौरान इसरो माइक्रोग्रैविटी से संबंधित चार जैविक और दो भौतिक विज्ञान प्रयोग करेगा। इसरो गगनयान मिशन पर हरित प्रणोदक के लिए हाइड्राज़िन को बदलने की योजना बना रहा है, जिसके लिए Liquid Propulsion Systems Centre (LPSC) पहले से ही हाइड्रॉक्सिलमोनियम नाइट्रेट (HAN), अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल और पानी से युक्त एक मोनोप्रोपेलेंट मिश्रित फॉर्मूलेशन पर काम कर रहा है।

गगनयान मिशन पर पांच विज्ञान प्रयोग किए जाएंगे, जिनका चयन ISRO ने अक्टूबर 2021 तक किया था। गगनयान पेलोड भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST), कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ (UASD), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), IIT पटना, भारतीय रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड वैज्ञानिक अनुसंधान (JNCASR) द्वारा विकसित किया जाएगा।

भारत का गगनयान मिशन क्या है?

गगनयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक मिशन है जिसका लक्ष्य 2024 तक तीन सदस्यीय दल को पांच से सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में (पृथ्वी से 300-400 किमी की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट पर) भेजना है।

गगनयान के लिए किस प्रक्षेपण यान (लॉन्च व्हीकल) का उपयोग किया जाएगा?

इसरो के गगनयान को लॉन्च करने के लिए जीएसएलवी एमके III (GSLV Mk III), तीन-चरण भारी लिफ्ट लॉन्च वाहन (3 stage heavy lift launch vehicle) का उपयोग किया जाएगा।

गगनयान में कितने अंतरिक्ष यात्री भेजे जाएंगे?

इसरो द्वारा निर्मित और संचालित गगनयान अंतरिक्ष यान का लक्ष्य 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी के लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) में लेकर जाना और वापस सुरक्षित पृथ्वी पर लेकर आना हैं।

इसरो के ह्यूमनॉइड रोबोट का नाम क्या है जो अंतरिक्ष में जाएगा?

इसरो के ह्यूमनॉइड रोबोट का नाम ‘व्‍योमम‍ित्र’ रखा है, जिसे मानवरहित गगनयान में अं​तरिक्ष में भेजा जाएगा। इसरो ने बताया कि ह्यूमनॉइड ‘व्‍योमम‍ित्रा’ रोबोट सभी लाइव ऑपरेशन करने में सक्षम है। इस रोबोट का निर्माण साल 2020 में क्या गया था।

गगनयान मिशन में भारत की मदद कौन-कौन से देश कर रहे है?

भारत के इस अंतरिक्ष मिशन में फ्रांस और रूस जैसे देश भारत की मदद कर रहे हैं। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान पर सहयोग करने के लिए फ्रांस और रूस की अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए है। जहां रूस ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को रूस में बेसिक ट्रेनिंग दिया है। जबकि फ्रांस के पास अंतरिक्ष चिकित्सा के लिए एक अनुभवी और अच्छी तरह से स्थापित प्रणाली है। इसमें CNES की सहायक कंपनी MEDES स्पेस क्लिनिक भी है, जहाँ अंतरिक्ष सर्जन प्रशिक्षण लेते हैं।

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