पेट्रोल और डीजल की जगह फ्लेक्स फ्यूल से चलेगी कारें | What is Flex Fuel in Hindi

What is Flex Fuel in Hindi

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 100% इथेनॉल ईंधन पर चलने वाली टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस कार का अनावरण किया। यह कार दुनिया की पहली इलेक्ट्रिफाइड फ्लेक्स फ्यूल वाहन का प्रोटोटाइप है। इसे BS6 स्टेज-2 के मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।

यह कार पूरी तरह से टोयोटा किर्लोस्कर मोटर द्वारा भारत में विकसित की गई है। यह कार 40% इथेनॉल और 60% इलेक्ट्रिक ऊर्जा से चलेगी। इस कार की लॉन्चिंग वैकल्पिक ईंधन और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह कार हाइब्रिड सिस्टम के लिए इथेनॉल ईंधन से 40% बिजली पैदा कर सकती है। जबकि इथेनॉल की कीमत करीब 60 रुपये प्रति लीटर है, यानी पेट्रोल के मुकाबले यह बेहद किफायती है जो फिलहाल 100 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इस मौके पर नितिन गडकरी ने कहा कि इथेनॉल ईंधन से चलने वाले वाहनों के लिए अभी भी समस्या बनी हुई है। देश में कोई इथेनॉल पंप नहीं हैं। इसलिए मैं पेट्रोलियम मंत्री से अनुरोध करता हूं कि वे सभी पेट्रोलियम कंपनियों को इथेनॉल पंप शुरू करने का आदेश दें।

How is Ethanol Made | इथेनॉल कैसे बनता है

इथेनॉल स्टार्च और चीनी के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है: इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जो स्टार्च और चीनी के किण्वन से बनता है। इसे पेट्रोल के साथ मिलाकर वाहनों में पर्यावरण अनुकूल ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से किया जाता है, लेकिन इथेनॉल का उत्पादन मकई, सड़े हुए आलू, कसावा और सड़ी हुई सब्जियों जैसे स्टार्चयुक्त पदार्थों से भी किया जा सकता है।

  • 1G एथेनॉल: फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठी चुकंदर, सड़े हुए आलू, मीठी ज्वार और मक्का से बनाया जाता है।
  • 2G एथेनॉल: सेकंड जनरेशन एथेनॉल का उत्पादन सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक सामग्रियों जैसे चावल, गेहूं की भूसी, कॉर्नकोब, बांस और वुडी बायोमास से किया जाता है।
  • 3G बायोफ्यूल: शैवाल से थर्ड जनरेशन का बायोफ्यूल बनाया जाएगा, जिस पर अभी काम चल रहा है।
How is Ethanol Made

What is flex fuel | फ्लेक्स फ्यूल क्या है?

एक ईंधन विकल्प जो आपकी कार को सुचारू रूप से चला सकता है। जब नया ईंधन बनाने के लिए पेट्रोल को इथेनॉल या मेथनॉल के साथ मिलाया जाता है, तो इसे Flex Fuel कहा जाता है। देशभर में जल्द ही फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली कारें नजर आएंगी। इस प्रकार का ईंधन पेट्रोल, इथेनॉल या मेथनॉल के मिश्रण से बनाया जाता है।

Flex Fuel को अल्कोहल-आधारित ईंधन भी कहा जाता है क्योंकि यह गन्ने और मकई जैसे उत्पादों से बनाया जाता है। इसे तैयार करने के लिए स्टार्च और चीनी का फर्मेंटेशन करना पड़ता है। भारत में गन्ना बड़ी मात्रा में उगाया जाता है, इसलिए बड़े पैमाने पर ऐसे ईंधन का निर्माण करना कोई समस्या नहीं होगी।

Types of Flex Fuel

What is its Speciality | इसकी खासियत क्या है?

टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस फ्लेक्स-फ्यूल एमपीवी (Toyota Innova HiCross Flex-Fuel MPV) पूरी तरह से प्लांट से प्राप्त ईंधन इथेनॉल पर चलेगी। इथेनॉल को E100 रेटिंग दी गई है, जो दर्शाता है कि कार पूरी तरह से वैकल्पिक ईंधन पर चलती है। एमपीवी में लिथियम-आयन बैटरी पैक भी होगा जो कार को ईवी मोड में चलाने में मदद करने के लिए पर्याप्त बिजली उत्पन्न कर सकता है। अभी तक, इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि इलेक्ट्रिफाइड इनोवा हाईक्रॉस फ्लेक्स-फ्यूल का उत्पादन संस्करण कब लॉन्च किया जाएगा और सड़कों पर आएगा।

Engine Power and Mileage | इंजन पावर और माइलेज

इनोवा हाईक्रॉस का फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण भारत में वर्तमान में बेचे जाने वाले एमपीवी के हाइब्रिड संस्करण से थोड़ा अलग है। इंजन को E100-ग्रेड इथेनॉल पर चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें सेल्फ-चार्जिंग लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग किया जाता है जिसका उपयोग एमपीवी को सिर्फ ईवी मोड में चलाने के लिए भी किया जा सकता है।

इनोवा हाईक्रॉस हाइब्रिड 2.0-लीटर 4-सिलेंडर पेट्रोल इंजन द्वारा संचालित है। यह इंजन 181 bhp की पावर जेनरेट करता है। इंजन को ई-सीवीटी ट्रांसमिशन से जोड़ा गया है। यह 23.24 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है।

Flex fuel will reduce pollution | फ्लेक्स फ्यूल से प्रदूषण कम होगा

प्रदूषण लगातार पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है। दुनिया भर के देशों में प्रदूषण को लेकर कई बार चर्चा हो चुकी है। बढ़ते प्रदूषण के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर जलवायु पर पड़ रहा है। दुनिया भर में प्रदूषण बढ़ाने में वाहनों का बड़ा योगदान है, लेकिन गैसोलीन के साथ इथेनॉल या मेथनॉल मिलाकर बनाया गया ईंधन पर्यावरण को प्रदूषण से बचाएगा।

इथेनॉल या मेथनॉल गैसोलीन की तुलना में बेहतर जलता है, जिससे प्रदूषण कम होगा। इथेनॉल के उपयोग से 35 प्रतिशत तक कम कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न होता है। इसके साथ ही ऐसे ईंधन के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड भी पैदा होता है। इथेनॉल ईंधन के उपयोग से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन भी कम होता है।

What is the benefit of an Ethanol Fuel Car | इथेनॉल ईंधन कार का क्या लाभ है?

कम महंगा: इथेनॉल ईंधन का सबसे बड़ा फायदा इसकी लागत है, जो वर्तमान में देश में लगभग ₹60 प्रति के आसपास लीटर है। नितिन गडकरी ने कहा है कि लॉन्च होने वाली कार 15 से 20 किलोमीटर का माइलेज दे सकती है। यह इसे पेट्रोल की तुलना में अधिक किफायती बनाता है, जो वर्तमान में लगभग ₹120 प्रति लीटर है।

पर्यावरण के अनुकूल (eco-friendly): पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल के उपयोग से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। इसके प्रयोग से वाहन 35% कम कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं। इथेनॉल सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है। इथेनॉल में 35% ऑक्सीजन सामग्री होने के कारण, यह ईंधन नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन को भी कम करता है।

इंजन की लाइफ बढ़ाता है: इथेनॉल या इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाला वाहन पेट्रोल की तुलना में बहुत कम गर्म होता है। इथेनॉल में अल्कोहल जल्दी वाष्पित हो जाता है, इसलिए इंजन जल्दी गर्म नहीं होता है। इससे इंजन की लाइफ बढ़ जाती है।

किसानों को फायदा: इथेनॉल की खपत बढ़ने से किसानों की आय भी बढ़ेगी, क्योंकि इथेनॉल का उत्पादन गन्ना, मक्का और कई अन्य फसलों से किया जाता है। चीनी मिल मालिकों को आय का नया स्रोत मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। इथेनॉल से किसानों को 21 हजार करोड़ रुपये का फायदा हुआ है।

सरकार को फायदा: दिल्ली में एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा, ‘यह ईंधन पेट्रोलियम आयात की लागत बचा सकता है। अगर हमें आत्मनिर्भर बनना है तो हमें तेल आयात को जीरो पर लाना होगा। फिलहाल देश इस पर 16 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है, जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।

Myths and Facts | मिथक और फैक्ट्स

मिथक:फैक्ट्स:
इथेनॉल मिश्रण खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा: अमेरिका में इथेनॉल मुख्य रूप से मकई से बनाया जाता है। उन्होंने 2018 में लगभग 14.9 बिलियन एकड़ मकई का उत्पादन किया, लेकिन उसमें से केवल एक तिहाई का उपयोग इथेनॉल ईंधन के लिए किया गया था।यह सूक्ष्म कणों, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य जहरीले प्रदूषकों की मात्रा को कम करके वायु की गुणवत्ता में सुधार करता है।
इथेनॉल इंजन को नुकसान पहुंचाता है: दुनिया भर के प्रमुख कार निर्माताओं ने इथेनॉल मिश्रण के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इथेनॉलकम्बशन क्लीन और एफिशिएंट है, जिससे इंजन का जीवन बढ़ जाता है। इसीलिए कई भारतीय वाहन निर्माता फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बना रहे हैं।इथेनॉल ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को औसतन 43% से 70% तक कम कर देता है।

मारुति भी फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पर काम कर रही है; टोयोटा के अलावा मारुति भी Flex Fuel गाड़ियों पर काम कर रही है। कंपनी ने इस साल जनवरी में ऑटो एक्सपो में वैगन आर प्रोटोटाइप पेश किया था। यह कार 85% इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल सकती है।

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