चंद्रयान 3 रोवर लेटेस्ट अपडेट | Chandrayaan 3 Rover Update Hindi

Chandrayaan 3 Rover Update Hindi

Chandrayaan 3 Rover Update Hindi, चांद की मिट्टी पर अशोक स्तंभ और इसरो लोगो की छाप, 14 दिन का ही मिशन क्यों, चांद पर पहुंचाने वाले इसरो के सितारे, चंद्रयान की सफलता बनाएगी वर्ल्ड लीडर, अंतरिक्ष में भारत का साथ चाहता है चीन, शिव शक्ति और तिरंगा पॉइंट क्‍या है? राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस

इसरो ने शुक्रवार को (25 अगस्त 2023) चंद्रयान-3 लैंडर से निकलने वाले छह पहियों और 26 किलोग्राम वजनी प्रज्ञान रोवर का पहला वीडियो साझा किया। गुरुवार से इसने चंद्रमा की सतह पर घूमना शुरू कर दिया है। गुरुवार सुबह लैंडिंग के करीब 14 घंटे बाद इसरो ने रोवर के बाहर निकलने की पुष्टि की। लैंडर 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा पर उतरा था।

Chandrayaan 3 Rover Update Hindi | चंद्रयान 3 रोवर लेटेस्ट अपडेट

चंद्रमा की सतह पर पहुंचते ही रोवर ने सबसे पहले अपने सौर पैनल खोले। यह 1 सेमी प्रति सेकंड की गति से चलता है और अपने आस-पास की चीजों को स्कैन करने के लिए नेविगेशन कैमरों का उपयोग कर रहा है। रोवर 12 दिनों में लैंडर के चारों ओर आधा किमी की यात्रा करेगा।

चांद की मिट्टी पर अशोक स्तंभ और इसरो लोगो की छाप

प्रज्ञान रोवर के पिछले दो पहियों पर भारत का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ और इसरो लोगो के इंडेंट है। जैसे ही रोवर चंद्रमा पर उतरा, उसके पहियों ने चंद्रमा की धरती पर इन प्रतीकों की छाप छोड़ दी। रोवर में दो पेलोड भी हैं जो पानी और अन्य कीमती धातुओं की खोज करेंगे।

छह पहियों वाला रोवर इलाके का सर्वेक्षण करने और छवियों को पृथ्वी पर भेजने के लिए अपने नेविगेशन कैमरों का उपयोग करेगा। इसके बाद इसरो रोवर को एक नोटिफिकेशन भेजेगा। रोवर लैंडर से 500 मीटर (1,640 फीट) तक की दूरी तय कर सकता है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो छोटी चट्टानें या ढलान रोवर के रास्ते में बड़ी बाधाएं पैदा नहीं करेंगी। भारत के रोवर की चीन के Yutu-2 रोवर से टक्कर होने की संभावना नहीं है।

भारत का रोवर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास है, जबकि चीन का रोवर वहां से ज्यादा दूर नहीं गया है जहां उसने पहली बार 45 डिग्री दक्षिणी अक्षांश पर जमीन को छुआ था। चीन के मजबूत रोवर की तुलना में भारत का रोवर ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा। इसरो ने कहा कि रोवर का मिशन एक चंद्र दिवस यानी पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर है। दूसरी ओर, चीनी रोवर Yutu-2 2019 की शुरुआत से परिचालन में है। यह चीनी अभियान चंद्रमा के दूसरी ओर पहुंचा, जिसे हम पृथ्वी से नहीं देख सकते।

चीन का रोवर क्या कर रहा है?

Yutu-2 अभी भी चंद्रमा की सतह की परिक्रमा कर रहा है। जब चंद्रमा रात में होता है तो वह बंद हो जाता है। यही वह समय है जब तापमान शून्य से 170 डिग्री से भी नीचे चला जाता है। Yutu, या जेड रैबिट नाम उस खरगोश के नाम पर रखा गया है जो चीनी पौराणिक कथाओं में देवी चांग’ई के साथ चंद्रमा पर गया था।

पहला चीनी चंद्र रोवर, Yutu दिसंबर 2013 में चांग ‘ई 3 लैंडर से चंद्रमा की सतह पर उतरा। छह पहियों वाला रोवर सौर ऊर्जा से संचालित है। यह 20 किलोग्राम का पेलोड ले जाने में सक्षम है। इसकी अधिकतम सीमा 10 किलोमीटर थी और यह पृथ्वी के 90 दिनों तक 3 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का पता लगा सकता था।

अगस्त 2016 में इसने काम करना बंद कर दिया। तब तक वह चंद्रमा की सतह पर 31 महीने तक यात्रा कर चूका था। चीन का अगली पीढ़ी का रोवर Yutu-2 से भी बड़ा होगा। यह चांग’ ई 7 मिशन के साथ चंद्रमा पर जाएगा, जो 2026 के आसपास लॉन्च होगा।

चंद्रयान-3 के साथ कुल 7 पेलोड भेजे गए है

Chandrayaan-3 Rover

चंद्रयान-3 मिशन के तीन भाग हैं। प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर और रोवर। इनके पास कुल 7 पेलोड हैं। चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल में SHAPE नामक एक पेलोड है। यह चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है और पृथ्वी से आने वाले रेडिएशन की जांच कर रहा है।

वहीं लैंडर पर रंभा, चास्टे और इल्सा ये तीन पेलोड और प्रज्ञान पर दो पेलोड हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का इंस्ट्रूमेंट ‘लेजर रेट्रोरेफ्लेक्टर ऐरे’ नामक एक उपकरण भी चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगाया गया है। इसका उपयोग चंद्रमा से पृथ्वी की दूरी मापने के लिए किया जाता है।

प्रोपल्शन मॉड्यूल पेलोड

SHAPE (स्पेक्ट्रो पोलारिमेट्री ऑफ हैबिटेबल प्लेनटरी अर्थ): चंद्रमा की कक्षा से पृथ्वी का अध्ययन करेगा। देखेगा कि क्या पृथ्वी जैसे रहने योग्य ग्रह के रेडिएशन में कोई खास बात है।

विक्रम लैंडर पेलोड

RAMBHA-LP (लैंगम्यूर प्रोब): प्लाज्मा के घनत्व और समय के साथ उसमें होने वाले बदलाव का पता लगाएगा। चंद्रमा पर कोई वायुमंडल नहीं है इसलिए सूर्य की किरणें इस पर लगातार पड़ती रहती हैं। इससे चंद्रमा की मिट्टी जल गई है और इसमें बारूद जैसी गंध आ रही है, इसलिए प्लाज्मा का अध्ययन किया जा रहा है।

ChaSTE (चंद्र सरफेस थर्मो फिजिकल एक्सपेरिमेंट): चंद्रमा के ध्रुव की सतह पर तापमान का अध्ययन करेगा।

ILSA (इंस्ट्रूमेंट फॉर लूनर सेस्मिक एक्टिविटी): लैंडिंग साइट के पास भूकंप को मापेगा और चंद्रमा की ऊपरी और भीतरी सतह की बनावट का अध्ययन करेगा।

प्रज्ञान रोवर पेलोड

APXS (अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर): चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों की मौलिक संरचना को मापेगा।

LIBS (लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप): ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोपी चंद्रमा की सतह की रासायनिक संरचना और खनिज संरचना का अध्ययन करेगा।

14 दिन का ही मिशन क्यों?

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक मनीष पुरोहित ने कहा कि चंद्रमा पर 14 दिन की रात और 14 दिन की रोशनी होती है। जब यहां रात होती है तो तापमान -100 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। चंद्रयान के लैंडर और रोवर अपने सौर पैनलों से बिजली पैदा करेंगे। इसलिए वे 14 दिनों तक बिजली पैदा करेंगे, लेकिनरात होते ही बिजली उत्पादन प्रक्रिया बंद हो जाएगी। बिजली उत्पादन के बिना इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अत्यधिक ठंड नहीं झेल पाएंगे और खराब हो जाएंगे।

चांद पर पहुंचाने वाले इसरो के सितारे

डॉ. एस. सोमनाथ: इसरो चेयरमैन, पूरे मिशन की जिम्मेदारी इन्हीं पर थी। स्पेस इंजीनियरिंग में दुनिया के प्रमुख विशेषज्ञों में शामिल हैं।
पी. वीरमुथुवेल: चंद्रयान-3 के समग्र मिशन प्रभारी। 3.84 लाख किमी की यात्रा के दौरान चंद्रयान इनकी टीम के कंट्रोल में रहा।
श्रीकांत सीवी.: चंद्रयान- 3 मिशन के डायरेक्टर और इसरो के प्रोजेक्ट डिप्टी डायरेक्टर। देश के प्रमुख खगोलशास्त्री हैं।
वी. नारायणन: डायरेक्टर लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर | चंद्रयान-3 के क्रायोजेनिक इंजन को इन्होंने ही डिजाइन किया है।
कल्पना के.: चंद्रयान- 3 मिशन की डिप्टी डायरेक्टर। इससे पहले चंद्रयान-2 और मिशन मंगल में अहम भूमिका निभाई है।
एम. शंकरन: यूआर राव अंतरिक्ष केंद्र के डायरेक्टर। इनके नेतृत्व में ही चंद्रयान बना। दो साल से लगातार मिशन में अलग-अलग भूमिका रही।
एस. मोहना कुमार: लॉन्च के लिए मिशन डायरेक्टर, इनके निर्देशन में चंद्रयान ने सटीक उपग्रह प्रक्षेपण स्थितियों को पूरा किया।
बीएन. रामकृष्ण: डायरेक्टर, इस्ट्रैक सैटेलाइट, नेविगेशन में एक्सपर्ट हैं। चंद्रयान-3 की ट्रैकिंग में अहम भूमिका निभाई है।
एस. उन्नीकृष्णन नायर: डायरेक्टर, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर। नायर मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रणालियों के विशेषज्ञ हैं।
नीलेश एम. देसाई: डायरेक्टर, एसएसी। चंद्रयान की लैंडिंग में दिक्कत आती तो उसके लिए देसाई ने प्लान-बी तैयार किया था।
डॉ. नीरज सत्य, खरगोन: गोगावां के नीरज थर्मल सिस्टम ग्रुप में मैनेजर व डिजाइनर थे । फ्यूल के तापमान को मेंटेन करने का जिम्मा इनकी टीम के पास था।
महेंद्र ठाकरे, बालाघाट: माओवाद प्रभावित बालाघाट के महेंद्र चंद्रयान-3 के प्रोजेक्ट हेड हैं। रॉकेट टीम में थे, जिसने चन्द्रयान को चंद्रमा की कक्षा में भेजा।
ओम पांडे, सतना: चंद्रयान की कक्षा और प्रक्षेपक की निगरानी, चंद्रयान की परिक्रमा पथ को बढ़ाने वाली टीम में थे।
प्रियांशु मिश्रा, उमरिया: भोपाल से पढ़े। चंद्रयान की पूरी ट्रेजिक्ट्री की डिजाइनिंग इन्हीं की टीम ने की।

Chandrayaan Journey to the Moon

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत का उतरना एक असाधारण घटना है। तमाम जोखिमों के बावजूद यहां लैंडिंग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में एक उभरता सितारा बना दिया है। रूस के ताज़ा मिशन की विफलता से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष बाज़ार में भी इसरो का दबदबा बढ़ गया है।

मल्टीनेशनल मैनेजमेंट कंसल्टेंसी आर्थर डी लिटिल (ADL) की एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग महत्वपूर्ण बदलावों से गुजर रहा है। सरकारी नेतृत्व वाले कार्यक्रमों से लेकर निजी क्षेत्र इसका नेतृत्व कर रहा है। भारत के उभरते अंतरिक्ष तकनीक स्टार्टअप इस बदलाव का एक उदाहरण हैं।

ADL की ‘अंतरिक्ष में भारत: 2040 तक 100 अरब डॉलर का उद्योग’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था मौजूदा 66,400 करोड़ रुपये से बढ़कर 2040 तक 8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, यानी 17 वर्षों में 1150% की भारी उछाल की उम्मीद है।

चंद्रयान की सफलता वर्ल्ड लीडर बनाएगी

इसरो की सैटेलाइट लॉन्च करने की सफलता दर 95% है। इससे सैटेलाइट की बीमा लागत आधी हो गई है। ये कारक भारत को दुनिया में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी लॉन्च साइटों में से एक बनाते हैं। चंद्रयान 3 की सफलता से भारत को इस क्षेत्र में वर्ल्ड लीडर बनने में मदद मिलेगी।

रॉयटर्स के मुताबिक, भारत ने हाल ही में सैटेलाइट लॉन्च रॉकेट बनाने के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं। इसमें 20 निजी कंपनियों ने रुचि दिखाई। हमारी नई अंतरिक्ष नीति लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों को प्रक्षेपण यान और उपग्रह बनाने की अनुमति देगी। इसरो की योजना लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान को निजी क्षेत्र को आउटसोर्स करने की है।

भारत में 140 अंतरिक्ष स्टार्टअप पंजीकृत हैं। पिछले कुछ सालों में इसमें बढ़ोतरी हुई है। कोरोना महामारी की शुरुआत में इनकी संख्या महज 5 के आसपास थी। पिछले साल, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने नए निवेश में लगभग 990 करोड़ रुपये जुटाए, जो हर साल दोगुना या तिगुना हो गया।

चीन अंतरिक्ष में भारत का साथ चाहता है

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि चीनी विशेषज्ञों ने अंतरिक्ष में विकासशील देशों के बढ़ते महत्व के प्रतिबिंब के रूप में इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने भारत से वैज्ञानिक प्रगति के लिए भू-राजनीतिक एजेंडे में शामिल होने का त्याग करने का आह्वान किया। भू-राजनीतिक एजेंडे पर ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे चीन विरोधी देशों के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का जिक्र किया। ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि विज्ञान की भावना राष्ट्रीय सीमाओं से परे है, इसलिए दुनिया भर के देशों के सहयोग से अंतरिक्ष अभियानों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

इस चीनी मुखपत्र ने आगे लिखा कि चीनी विशेषज्ञों ने भारत की सहायता का स्वागत किया और कहा कि दोनों देश उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SEO) के सदस्य हैं। दोनों पक्षों के बीच गहन अंतरिक्ष सहयोग का व्यापक दायरा है। दोनों देश अंतरिक्ष अन्वेषण और मानव मिशनों के लिए डेटा साझा करने, अनुभव साझा करने और अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण देने पर मिलकर काम कर सकते हैं।

What is Shiv Shakti and Tiranga Point | शिव शक्ति और तिरंगा पॉइंट क्‍या है?

23 अगस्त 2023 की शाम को चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल चंद्रमा के जिस जगह पर उतरा, उसे अब ‘शिव शक्ति‘ के नाम से जाना जाएगा। इसरो सेंटर में वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि “चंद्रयान 3 में महिला वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई है। यह ‘शिव शक्ति’ प्वाइंट आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा कि हमें विज्ञान का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए ही करना चाहिए। मानवता का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्रतिबद्धता है।”

चंद्रमा पर वह स्थान जहां चंद्रयान-2 ने अपनी छाप छोड़ी थी, उसे अब ‘तिरंगा प्वाइंट‘ कहा जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि “ये तिरंगा प्वाइंट भारत के हर प्रयास की प्रेरणा बनेगा, ये तिरंगा प्वाइंट हमें सिखाएगा कि कोई भी विफलता अंतिम नहीं होती।”

National Space Day | राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस उस दिन मनाया जाएगा जिस दिन चंद्रयान 3 ने चांद लैंडिंग की। यानी हर साल 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाएगा। इसरो सेंटर में वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने घोषणा की कि 23 अगस्त, जिस दिन चंद्रयान -3 चंद्रमा पर उतरा था, अब राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day) के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे देश के युवाओं को प्रेरणा मिलती रहेगी।

Leave a Comment